Thursday, September 21, 2017

इस बार का बेगूसराय


                                    हम अपने शहर में जाएंगे मुसाफिर की तरह

बेगूसराय को नए तरीके से देखने के लिए यह अंतिम मौका होगा शायद! अगर इस बार बेगूसराय नया नहीं लगा तो फिर कब लगेगा!

यह पहली बार होगा जब तमाम द्वंद्व को साधते हुए बेगूसराय स्टेशन पर एक लड़का उतरेगा। क्यूं इतना रोमांचित हूं इस बार बेगूसराय जाने के लिए मैं!

हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसे दृष्य फिल्माये गए हैं जिसमें धौंस जमाते हुए कोई कहता है कि "दरवाजा उधर है...अब आप जाते हैं कि मैं सिक्युरिटी को बुलाऊं"!

"रहना है तेरे दिल में" में सैफ अली खान अनुपम खेर को दरवाजा दिखाता है जब अनुपम खेर खान को दिया मिर्जा और अपने बेटे के साथ प्यार की बात बताने आता है। खेर मायूस होकर बदनामी को घोंटते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ता है। फिल्म आगे बढ़ती है और अनुपम खेर फिल्म खत्म होने से पहले हवाईअड्डे पर खुशी के मारे पागल दिखता है, जब दिया मिर्जा खुद को खान वहां हवाईअड्डे पर लाकर खेर के बेटे को सौंप देता है!

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बेआबरू होकर कहीं से निकलना कैसा लगता होगा! घर से, मुहल्ले से, जिले से, राज्य से और हद से हद तक किसी के मन से, दिल से, डायरी से!

कितने लोग डायरी से बेआबरू होकर निकल लिये इसका हिसाब कभी फुरसत में किया जाएगा और साथ में यह भी हिसाब किया जाएगा कि उनके निकलने की क्या-क्या वजहें रही होंगी!

अपन कितनों की डायरी में आए-गए इसका हिसाब किताब वे करें!

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बेगूसराय एक मनहूस शहर जैसा ही एक जगह रहा है! घुप्प अंधेरे में संभावनाओं की तलाश में कटते हुए दिन-रात एक मनहूसियत से दौर में बीता हुआ समय से ज्यादा और कुछ भी नहीं था।

उस समय में बने हमदर्द ताउम्र हमदर्द बन गये और उस समय में छिटके लोग ताउम्र निशाने पर आ गये।

सिकंदर आईआईएमसी के बाद भी संपर्क में रहा। उसकी बातचीत से कई बार ऐसा लगा कि हम दोनों में काफी चीजें साझी है।

एक बार उसने बताया था कि किस तरह आकाशवाणी में काम करने के दौरान उसे एक बड़ी महिला अधिकारी ने अपमानित किया था। सिकंदर स्वाभिमानी था और उसने वहां से इस्तीफा दे दिया। बहुत दिनों के बाद मालूम हुआ कि सिकंदर सीआईएसएफ में अफसर बन गया है। यूं ही बातचीत में एक बार पूछा कि जाके उस मैडम को अब अपनी शक्ल दिखा दे शायद वह शर्मिंदा हों! सिकंदर ने टाल दिया। वह अब उस दौर में वापस नहीं जाना चाहता था और उसकी बात से ऐसा लगा कि उसने उनको माफ कर दिया या फिर बात को भूल गया।

ऐसा कई बार होता है कि आदमी आगे बढ़ जाने के बाद ऐसे लोगों को सबक सिखाने के बजाय उसको नजरअंदाज कर जाता है।


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