Friday, September 15, 2017

विशेष


                                             तुम जो मिल गये हो...

एक नेगेटिव मोड से निकलकर दूसरे नेगेटिव मोड में ही फंसते रहना, यह वह प्रक्रिया थी जो सालों से चलती आ रही थी।

हर बार की तरह 14 सितंबर की रात आई और हर बार की तरह मैं बिस्तर पर लंबा होकर गहरे में जाने की तैयारी में लग गया। हर बार की तरह दिवाल ने सहारा दिया लेकिन हर बार की तरह इस बार नींद नहीं आई क्योंकि हर बार की तरह इस बार शून्य नहीं था। इस बार भाग्य थी जो पास में मोबाइल पर रोमांटिक गाने चला रही थी।

12 बजते ही उसने बर्थ डे विश किया। फिर दूध गर्म करने के लिए उठी।

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आदमी चाहे जो भी कह ले प्यार उसे अच्छा लगता है। नाउम्मीद हो चुके आदमी में भले ही प्यार की अपेक्षा खत्म हो जाती है लेकिन कुछ है जो हमेशा इसे जिलाए रखता है।

नाउम्मीदी के एक लंबे दौर को जीने के बाद उमंग खत्म हो जाती है। आदमी दर्शनार्थी की तरह चीजों को देखना शुरू करता है और हर चीज में अंदर तक धंस जाता है। हर चीज को परत दर परत खोलने की लत लगती है और फिर आदमी दूसरों की नजर में फ्रस्ट्रेटेड और अपनी नजर में ऑथेंटिक बनने लगता है।

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...खुशी के लिए रुपयों की जरूरत होती है इसे लेकर स्टैंड तय नहीं हो पा रहा था। अनुभव बताता है कि खुशी आपसी समझदारी के सहारे छोटी चीजों से भी हासिल की जा सकती है!

चीजों को मानकर भी खुशी हासिल की जा सकती है। यह उस सिद्धांत पर आधारित है जिसके तहत कहा जाता है कि आदमी को पहले खुद का सम्मान करना चाहिए।

मान लो कि तुम्हारे पास वह सबकुछ है जो तुम्हें खास और सबसे अलग बनाता है।

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भाग्य को दूध गर्म करने में इतनी देर पहली बार हो रही थी!

क्या कर रही हो
अरे...ठंढा कर रही हूं..

जीवन रात में भी उसी गति से चलती है जिस गति से दिन में चलती है। रात में जीवन स्थिर सा लगता है लेकिन वह स्थिरता आसमान में उड़ रहे हवाईजहाज की तरह ही है, जहां एहसास तो स्थिरता का होता है लेकिन होते हैं सब गति में। कई बार रात की गति दिन की गति से तेज होती है।

देर रात की शांति में मन शांत था। उसी शांत मन में शांति के साथ खयाल भी चल रहे थे और वह निर्बाध चलता रहे इसके लिए जरूरी था कि बकाया सारा काम निपटा कर नींद के आगे आत्मसमर्पण कर दिया जाए।

दूध इतना क्या गर्म हो गया..
बस हो गया..

बीप बीप ने रात की शांति भंग की। किसी अनजान नंबर का मैसेज था और जन्मदिन की बधाई के साथ कोई नाम भी नहीं लिखा था!

मोबाइल सिरहाने में पड़ा था। मोबाइल ऑफ करने के बाद झटके से उठा तो आंख फटी रह गई। भाग्य छिपकर बैलून फुला रही थी और बगल में रखा दूध अपनी गति में ठंढा हो रहा था।

                                                                              जुनून-ए-इश्क
शादी के बाद पहली बार इतना प्यार भाग्य के लिए अचानक से उमड़ा था।

भाग्य जिस धुन में बैलून एक के बाद एक फुलाए जा रही थी, वह धुन पहली बार मैंने देखा था। गर्भ के सातवें महीने में भाग्य ने करीब तीन मिनट में छह बैलून फुला कर तैयार कर दिये थे, वह भी बिना मुझे बताए।

सरप्राइज जारी रखते हुए उसने छिपाकर रखा हुआ केक निकाला और फिर आखिरकार मैंने अबतक का सबसे यादगार जन्मदिन अपनी जीवनसाथी के साथ एंटोपहिल के एक बंद कमरे में मनाया।

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और अंत में...












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