Wednesday, May 10, 2017

समय से संवाद



                                                खाई

ह जो अंतहीन रिक्तियां है उसे भरने की जरूरत समय की मांग है. अलग-अलग दिशाओं की तरफ जाते हुए रास्ते के बीच दिख रही ये रिक्तियां अनिर्धारित आकार की हैं.

सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल की जलती हुई हेडलाईट को देखकर पहले जहां हाथ उसे इशारा देने के लिए उठता था, वहीं आज हाथ की ऊंगलियां अपनी हेडलाईट के बटन पर जाती है कि कहीं अपनी हैडलाईट भी तो नहीं जल रही! सजगता, सतर्कता और सहजता का एक नया अध्याय है, जो नए समय में महसूस किया जा रहा है. यह एक रिक्ति है जो पहले और बाद के बीच में है.

पच्चीस के बाद का समय विचित्र होता है. तत्परता उस ओर से इस ओर शिफ्ट हो जाती है. ऐसा लगता है कि दूसरे को उसकी भूल का ध्यान दिलवाने में दिया जाने वाला वक्त आत्मसमीक्षा को दिया जाता है.

यू ट्यूब का शुक्रिया उन गानों को एक क्लिक पर उपलब्ध करवा देने के लिए जिसकी जरूरत अविलंब होती है. 

पिछले दिनों एंटोप हिल के पास षणमुखानंद हॉल में मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर के अस्सीवें जन्मदिन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने म्यूजिक थेरेपी का जिक्र किया था. जब महाजन अपना संबोधन कर रही थीं तक शायद उन्हें यह अंदाजा नहीं होगा कि वह जिस थेरेपी की बात कर रही हैं उसका इस्तेमाल सभा में बैठा एक पत्रकार सालों से कर रहा है.

मेरी हर मनमानी सिर्फ तुम तक...
तू किसी रेल सी गुजरती है...
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर...
वगैरह वगैरह...












1 comment:

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