Sunday, June 19, 2016

अकस्मात सा कुछ


                                           मिथुन का इस तरह जाना


ऐसे समय में जब स्कूल और कॉलेज के सहपाठियों के शादी की फोटो हर कुछ दिनों में फेसबुक पर देखने को मिलती है, मिथुन के अचानक न होने की खबर ने कुछ देर के लिए सबकुछ रोक दिया।

महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की दो दिनों की बैठक कवर करने परसों रात ही पुणे आया था। आज नितिन गडकरी का समापन भाषण था। उनकी बातों को वाट्सएप पर नोट कर रहा था तभी जितेन्द्र ने स्कूल के ग्रुप पर यह मनहूस खबर दी। कुछ देर के लिए तो लगा कि वह मजाक कर रहा है! मैसेज इग्नोर कर दिया।

अगले ही पल उसने मिथुन की निर्जिव फोटो डाल दी ग्रुप में। मन मानने को फिर भी तैयार नहीं हुआ और लगा कि तस्वीर किसी फोटो एडिटिंग एप से एडिट करके जितेंद्र ने मजाक में डाली है। फोटो जूम करके देखा तो मन बुझ गया।

मिथुन और मैं साथ में बेगूसराय के काॅलेजियट स्कूल में पढ़ते थे। हालांकि मेरी उससे नजदीकी कभी नहीं थी लेकिन हमदोनों एक दूसरे को जानते थे। उसको स्कूल के समय में कभी करीब से जानने या समझने की मेरी जिज्ञासा नहीं रही क्योंकि वह मेरी तरह का लड़का नहीं था।



करीब साल भर पहले मुंबई की आबोहवा से ऊब कर वापस लौटने की अजीब बेचैनी महसूस हुई तो स्कूल के दोस्तों को याद करने लगा. कक्षा सात में गणित के शिक्षक विश्वम्भर सर का सबसे चहेता छात्र था चंदन.

फेसबुक के सर्च बॉक्स में उसका पूरा नाम डाला तो वह एक बार में मिल गया. अगले पल फ्रेंड रिक्वेस्ट पर क्लिक करने के साथ ही सरसरी निगाह से उसके प्रोफाइल को चेक किया तो पता चला कि वह सऊदी अरब में रह रहा है. अच्छा लगा. फिर उससे फोन पर बात हुई और इस तरह तय हुआ कि स्कूल के जितने भी लड़के संपर्क में हैं सबको एक वाट्सएप ग्रुप में शामिल किया जाये. मिथुन भी उस ग्रुप में शामिल किया गया.

बाद में जब मेरा एक बार बेगूसराय जाना हुआ तो सालों बाद उस
वाट्सएप ग्रुप में जितने सहपाठी थे उनमें से जो भी बेगूसराय में था, उससे मिलना हुआ. पहले बनी योजना के अनुसार हमलोग चाट खाए और लस्सी पीये. मिथुन का मन जुबिली ढावा जाने का था, लेकिन मेरे न करने पर पूरी योजना खराब हो गई. मिथुन जिंदगी का ज्यादा लोड न लेने वाला लड़का था, जहां तक मैं उसे समझ पाया था. अपनी समझदारी के हिसाब से वह बात करता और दूसरे की बात पर अपनी बात को ऊपर रखने के लिए आक्रामक रुख अपनाता.

एक अफसोस यह है कि अगर मुझे यह पता होता कि उस रात की मुलाकात मेरी और मिथुन की आखिरी मुलाकात थी तो मैं उसके कहने पर जुबिली ढावा जरूर जाता. भले ही आदतन शराबी नहीं हूं लेकिन उसके कहने पर अपने बनाए नियमों को भी तोड़ देता. अब यह मलाल तो रहेगा हरदम कि उसके साथ मेरी आखिरी मुलाकात अधूरी ही रह गई!

शांति दे मौला उसकी आत्मा को!

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प्रिय आकाश,

ये जो तुम्हारा सन्नाटा है उसे कभी हिम्मत करके देखता हूं मैं. कितना शोर है यहां और कितनी तसल्ली है वहां तुम्हारे पास. पता है तुम्हें मुझे पहाड़ों पर अकेला चलना बहुत पसंद है. पुणे के पुरंदर किले को देखने की जब मैंने इच्छा जताई तो मेरे ड्राइवर ने मना कर दिया. सेना के एक जवान से मैंने कितना भी आग्रह किया लेकिन उसने मोबाईल ले जाने मना कर दिया.

ड्राइवर को गाड़ी में छोड़ कर मैं जब उतनी ऊंचाई पर बिना किसी संपर्क यंत्र के अकेला गया तो तुम्हारे बहुत करीब आया मैं. शिवाजी के किले से एकबारगी लौटने का मन किया लेकिन फिर सुनने में आया कि और ऊपर शिवजी का एकांत में कोई मंदिर है. मन नहीं माना तो आगे बढ़ गया. पसीने से तर होकर आखिर पहुंचा मैं वहां जहां से सुदूर बस बादल और शांति दिखाई दे रही थी.

वो जगह मेरे मन में अब बैठ गया है. आगे कभी पुणा जाना हुआ तो फिर से उस ऊंचाई पर अकेला चढ़ाई करूंगा.

मेरा एक स्कूल का दोस्त गया है तुम्हारे पास अपना शरीर नीचे छोड़कर. तुम्हें पता है कि मैं कभी किसी को दोस्त नहीं कहता. सहपाठी, साथी, परिजन वगैरह कहता हूं. दोस्त इसलिए कह रहा हूं कि तुम मिथुन का बाकी लोगों से भेद कर पाओ. उसे तसल्ली देना.

तुम्हारा!

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और अंत में,

अलविदा मिथुन गांधी


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