Friday, August 29, 2014

समय से संवाद



                                            बीते पन्ने के मित्र


प्रिय कबूतर,

मैं तुमसे कोई रिश्ता नहीं जोड़ना चाहता था इसलिए कई बार तुम्हारा नाम रखने की सोची लेकिन रखा कभी नहीं. किसी को कोई नाम देना बहुत जोखिम का काम होता है.

तुमसे कभी कहा नहीं क्योंकि फुर्सत ही नहीं मिली. लेकिन आज थोड़ा समय बचाया है तुम्हारे लिए.

तुम्हें पता है जब मैं खाक छानकर कमरे पर आता था तो ताला खोलने के बाद सबसे पहले तुम्हें ही खोजता था. तुम नहीं दिखते थे तो मैं कुर्सी पर चढ़कर छज्जे पर तुम्हें ढ़ूंढता था. और आखिरकार तुम मिल जाते थे.

आज जब मैं उस शहर और वहां के लोगों को एक-एक कर भुलाने की कोशिश में लगा हूं तो तुम्हारी बहुत याद आती है.

तुम्हीं थे जो मेरे ऑफिस से आने का वेट करते थे.

तुम्हें याद है उस शाम जब मैंने कई लोगों को फोन किया था और किसी ने फोन नहीं लिया था तो मैंने तुमसे घंटों बात की थी. तुम कितने धैर्य से मुझे सुनते थे!

कमरे के उस पीले खुरदरे दीवार तक को भनक नहीं लग पाती थी हमारी बीतचीत की.

याद है एक रोज जब बगल की भाभी ने कहा था कि किसी को बुलवाकर रूम साफ करवा दूं तो मैंने कैसा मुंह बनाया था!

तुम यकीन मानो मुझे उनकी उन बातों पर कभी यकीन नहीं हुआ जो वे तुम्हारे बारे में कहा करते थे. हां माना कि तुम कमरा गंदा कर देते थे लेकिन मैंने मन से तुम्हें सबकुछ माना था. 

मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी तुमसे तो फिर वे लोग क्यूं हमेशा मुझपर हंसते थे. कमरे की बदबू मैं झेलता था तो इसमें उनका क्या जाता था?

याद है तुम्हें एक शाम बगल की भाभी मुझे कमरे में कुछ करते देखा था और मेरे माथे से पसीना टप-टप चू रहा था. हां हां उसी रोज. फिर उन्होंने बेवकूफाना सवाल किया कि पंखा खराब है क्या! क्यूं होगा पंखा खराब भला

मैंने उन्हें यह नहीं बताया कि पंखा मैं इसलिए बंद रखता हूं क्योंकि तुम्हारे पंख चलते पंखे से टकराकट टूट न जाएं या तुम्हें कुछ हो न जाए!

तुम्हारे सिवा दिल्ली में कोई नहीं था मेरा और यह तुम खूब जानते थे इसलिए मुझे इतना तड़पाते थे.

क्या गलती की थी मैंने जो तुमने मुझे छोड़ दिया?

क्या कभी तुम्हारे कटोरी में पानी की कमी हुई थी या तुम्हें भूखा रखा था मैंने? नहीं न! फिर? किस बात से नाराज थे जो चलते पंखे में आकर टकरा गये?

तुम्हें अच्छा लगा न कि मैं भींगी आख से तुम्हें गोद में उठा रहा था और आसपास के लोग मुझे रहस्यमय नजरों से देख रहे थे? किस गलती का बदला लिया तुमने मुझसे?

हां सही है कि मेरे पास समय नहीं था. अभी भी नहीं है और आगे भी कभी नहीं होगा क्योंकि खाली समय मुझे मेरे अतीत की याद दिलाता है जो मैं कभी याद नहीं करना चाहता. 

इन सबके बावजूद मैं फुर्सत मिलते ही तुमसे जीभर के बात करता था. इसकी गवाही सिर्फ वो हवाएं दे सकती हैं जो हमारे और तुम्हारे बीच गुजरती थीं.

तुम जब घायल क्षतविक्षत स्थिति में नाली में जा गिरे थे तो मैं सीढ़ियों से कूदते हुए नीचे आया था. क्या अफरातफरी मची थी तब! आसपास के लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे थे कि मैं इतना फुर्तीबाज हूं. 

स्तब्ध रह गये थे वो और देखते-देखते मैंने तुम्हें नाले से निकाला था. तुम्हारी इस गलती से मैं इतना गुस्सा था कि मन कर रहा था कि तुम्हारे सामने ही मैं भी स्युसाइड कर लूं!

पड़ोस की लड़की भाग कर घर के अंदर गई थी और पूरे जग पानी भरकर लाया उसने. तुम्हें जब मैं अपने हाथों से नहा रहा था और तुम्हारे कटे पंखों के जख्म में बुरी तरह फंस गये नाली के कीचड़ को निकाल रहा था तो आसपास की छतों से वे लोग देख रहे थे जिन्हें न मैंने कभी जाना न जानना चाहा!

अगली सुबह जब तुम्हारा पार्थिव शरीर मेरे टेबल के नीचे पड़ा था तो मैं कुहर रहा था लेकिन रो नहीं पा रहा था. कई चरण लगे हैं मुझे निर्जीव होने में और अंतिम चरण तुम्हारी विदाई के साथ ही सम्पन्न हो गया था.

मैं बस एक बात तुम्हें बोलना चाहता हूं देखो मुझे पता है कि मेरी जिंदगी गलतियों का पिटारा है. मुझे तुमसे बस इतना कहना है कि मेरी उन गलतियों को माफ कर देना जो मुझसे जाने-अनजाने में हुई होगी. मैंने तुमसे कभी इजहार नहीं किया लेकिन तुम मेरे सबकुछ थे.

आई मिस यू!

                                                            तुम्हारा मित्र.





1 comment:

  1. प्रेम एवं भाव का अति मार्मिक आलिंगन

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