Tuesday, July 22, 2014

कांग्रेस के


                                       बुरे दिन आ गये!



क्या है नेशनल हेराल्ड प्रकरण”?

सीधे शब्दों में कहें तो यह वित्तीय अनियमतता यानि धोखाधड़ी का मामला है, जिसका आरोप सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी पर है.

नेशनल हेराल्ड की स्थापना 1938 में जवाहर लाल नेहरू ने की थी। अंग्रेजी के इस समाचार पत्र के साथ ही हिंदी में नवजीवन और ऊर्दू में कौमी आवाज का भी प्रकाशन शुरू हुआ था.
आर्थिक बाधाओं के कारण 1942-77 के बीच यह समाचार-पत्र बंद रहा. हालांकि 1986 में राजीव गांधी के कार्यकाल में इसे गति देने के लिए फिर से ताकत झोंकी गई लेकिन नतीजा निराशाजनक ही रहा.

अचानक 1998 में लखनऊ संस्करण को बंद कर दिया गया और 1 अप्रैल, 2008 को नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने अपना दिल्ली संस्करण भी बंद कर दिया.

2010 में वित्तीय देनदारियों का निपटान करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने उसे 90 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण भी दिया था.

इसी दौरान पता चला कि दिल्ली के हेराल्ड हाऊस के पते बहादुर शाह जफर मार्ग पर पंजीकृत कंपनी यंग इंडिया ने 99.1 फीसदी शेयर के साथ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया.

हल्ला यहीं से मचना शुरू हुआ.

मोतीलाल बोरा, ऑस्कर फर्नांडिज और सैम पित्रोदा भी आ सकते हैं लपेटे में

यंग इंडिया नामक जिस कंपनी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है उसके 76 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और बेटे राहुल गांधी के नाम हैं.

बाकी 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेसी नेता मोतीलाल बोरा, ऑस्कर फर्नांडिज, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा के पास है.

नेशनल हेराल्ड के नाम पर दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पंचकूला और भोपाल सहित देश के कई हिस्सों में दो हजार करोड़ रुपयों से ज्यादा की परिसंपत्तियां है.

अदालत के भीतर

अदालत ने माना कि शिकायत और सबूतों को देखकर जाहिर होता है कि यंग इंडिया पनी का गठन इसलिए किया गया ताकि जनता के पैसों को व्यक्तिगत प्रयोग में बदला जा सके, या फिर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की दो हजार करोड़ रुपयों की संपत्ति के अधिग्रहण के लिए इस कंपनी को बनाया गया है.

जनप्रतिनिधित्व कानून की कोई भी धारा या पार्टी का संविधान वाणिज्यिक गतिविधियों में शामिल किसी भी कंपनी को इस तरह का कर्ज देने की अनुमति नहीं देता.

7 अगस्त को अदालत को अदालत के समक्ष कांग्रेसी नेताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी रखेंगे. वहीं दूसरी ओर का मोर्चा सुब्रह्मण्यम स्वामी संभाल रहे हैं.








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