Friday, July 18, 2014

वो जब याद आए


                                       बहुत याद आए...

श्यामा चरण मिश्रा बेगूसराय के मूर्धन्य पत्रकार हैं. जब मैंने वहां पत्रकारिता शुरू की थी तब वह हिंदुस्तान से जुड़े थे. सिटी न्यूज दफ्तर में कभी-कभी उनकी चर्चा हो जाया करती थी. जब मैं सिटी न्यूज से हिंदुस्तान में गया तब पता चला कि उनका तबादला खगड़िया हो गया है. इस तरह मैं उनसे मिलने से वंचित रह गया.

एक अंतराल के बाद संयोगवश उनसे नगर पालिका स्थित एक साइबर कैफे में मुलाकात हुई. उसी दौरान पता चला कि वह वापस बेगूसराय आ गये हैं और यहां उन्हें कृषि विभाग(बीट) दिया गया है.
बेगूसराय की पत्रकारिता में अथाह पैसा है यह वहां पत्रकारिता करते हुए समझा जा सकता है. लोकप्रियता खरीदने में लगे वहां के विधायक, ग्रामीणों को जागरूक करने के नाम पर चलने वाले तमाम एनजीओ, तमाम डॉक्टर, छोटे-मंझोले व्यापारी, कुकुरमुत्ते की तरह उगते जा रहे निजी स्कूल और पार्ट-टाइम समाजसेवियों से पटे उस जिले में अगर सिटी न्यूज का चपरासी भी अपनी साइकिल में प्रेस लिखकर घूमता था तो उसका कोई मतलब था!

बहरहाल, पता चला कि श्यामाचरण मिश्रा के बेगूसराय में आने से जहां पत्रकारिता में रौनक फैली है वहीं उनके दफ्तर में ही उन्हें दम घोंट कर मार देने की तैयारी कर ली गई है. दरअसल, श्यामाचरण मिश्रा की बेगूसराय में इतनी साख थी जितनी वहां किसी पत्रकार की नहीं थी. सबसे दिलचस्प बात यह थी कि बेगूसराय के जिस ब्यूरो चीफ के अंदर उन्हें काम करना था वह बुरी तरह बदनाम थे. सबसे मजेदार बात यह थी कि उस ब्यूरो चीफ को किसी समय में पत्रकारिता श्यामाचरण मिश्रा ने ही सिखाई थी.

समय का चक्र था!

अनायास ही श्यामाचरण मिश्रा की याद इसलिए आ गई क्योंकि खबर है कि हरियाणा के बेहद चर्चित आईएएस अशोक खेमका ने बीज और कीटनाशक घोटाले को खोज निकाला है. शरद पवार ने बिना देर किये जांच के आदेश भी दे दिये हैं. खेमका जितने साल काम किये हैं उससे दोगूनी बार उनका तबादला हो चुका है. सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर जमीन घोटाले का आरोप लगाकर सनसनी मचाने के बाद उनका तबादला हरियाणा बीज विकास निगम में इसलिए कर दिया गया था कि वह निष्क्रिय हो जाएं. लेकिन खोद दिया उन्होंने उस विभाग को भी.

कुल मिलाकर कहूं तो श्यामाचरण मिश्रा और अशोक खेमका में एक समानता जरूर है कि दोनों ही गजब के आदमी हैं. खेमका जहां जाते हैं वहीं खोद डालते हैं तो श्यामाचरण मिश्रा के लिए यह बता दं कि जब से उन्हें कृषि विभाग दिया गया था तबसे रोजाना बीज घोटाले से लेकर उस बीट की तमाम खबरें वहां प्रमुखता से न केवल छपने लगी बल्कि उस विभाग से जुड़े अधिकारी भी भौंचक रह गये.

एक कहावत है कि शेर जहां जाता है शेर ही रहता है. यह कहावत इन्हीं धुरंधरों के लिए बना है!

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