Wednesday, November 2, 2011

                             आधा दिन + आधा दिन = पूरा दिन 
        ऑफिस में राजनीति का अनुभव लिए बिना अगर कोई रास्ते पे चल रह है तो उसे जिधर तिधर ब्रेकर मिलेगा और किसी न किसी ब्रेकर पे वो धडाम से गिड़ेगा ही. ये अपना फुल कांफिडेंस है. पिछली दफा बेगूसराय में हिन्दुस्तान में काम करते करते मिले अनुभव से सिखा आज काम आ रहा है. 
       ये शायद पहली बार है जब कोई स्टेप लेने से पहले मैंने सोचा है, खूब सोचा है, लोगों से सलाह ली है, और फाइनली डिसाइड किया है कि कुछ नहीं करना है इस साल तक. इस साल सब बर्दाश्त. सब कुछ बर्दाश्त. हालाँकि बेकाबू प्रतिक्रिया का कुछ कहा नही जा सकता है लेकिन काफी हद तक खुद को नियंत्रण में रख पाने में सफलता मिली है इस बन्दे को इस बार. जय हो.

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