Friday, October 28, 2011

                                        तुम्हारे इंतज़ार में...
        सोचता हूं खूब लिखूं. सब कुछ. जो हुआ. जो हो रह है और जो लगता है कि अब हो जाएगा. लेकिन लिखने से पहले ही थकान सी लगने लगती है. कभी कभी खुद को उस कुत्ते कि तरह देखता हूं जो गाडी के पीछे दौर तो लगा रह है लेकिन गाडी के रुकने के बाद करना क्या है ये उसे पता नहीं. कोई आस पास होता तो थोडा बतिया लेता. खुद को खोने जैसा क्यूं लगता है कभी कभी? सब तो ठीक ही है. नौकरी है. थोडा ही सही पैसा भी है. परिवार भी है. सेहत भी ठीक ठाक है.  इंश्योरेंस भी करवा ही लिया है. कोई वैसा अपराधबोध भी नहीं है. पढाई भी चल रही है और शादी!!! फिर से शादी!! हम्म...!
        क्या शादी करनी जरुरी है? बेटी के लिए तो जरुरी ही है...हम्म...बिना शादी के बेटी कैसे होगी? एक बेटी तो चाहिए जिन्दगी जीने के लिए कम से कम. दो चोटी वाली एक बेटी जिसके कंधे से बस्ता उतारते समय वो कुदक के गोद में आ जाय. लेकिन...ह्म्म्म!! क्या लेकिन? लेकिन..! क्या? लेकिन उसे बुरा लगा तो? उसे क्यूं बुरा लगेगा वो भी तो किसी की बेटी है. नहीं यार तुम समझे नहीं. तो समझाओ न! जाओ मैं नही बोलता बेकार है बोलना. ठीक है मत बोलो. अच्छा सुनो. देखो ये मुझे पता है कि मै बेटी को ज्यादा मानूंगा फिर उसे बुरा लगेगा तो!! धत्त..तुम भी बौरा गए हो एकदम से..ह्म्म्म..! देखा इसलिए नहीं बता रहा था मुझे पता था तुम नहीं समझोगे! जाओ मुझे अकेला छोड़ दो. तंग आ गया हूं इस दुनिया से, इस दुनियादारी से, दिखावा से, लालच से, सब से और खुद से भी. लेकिन तुम तो बोलते थे कि तुम खुद को बहुत प्यार करते हो. अब क्या हुआ मिस्टर मेंटल..ह्म्म्म. हां मै खुद को प्यार करता हूं लेकिन हमेशा नहीं कभी कभी खुद से बहुत नफरत भी करता हूं.
           अच्छा ये बताओ कि उसमें ऐसा क्या है? यार प्लीज़ टिपिकल कोश्चन मत करो. अरे इतना आसान तो सवाल है आखिर उसमें क्या है? उसमें कुछ नहीं है इसलिए उसे चाहता हूं हो गया न अब जाओ यहां से फूटो. मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी. मैं चले जाऊंगा लेकिन तुम्हे आज ये बताना ही पड़ेगा कि उसमें ऐसा क्या है? 
           वो आई पोड अगर होता तो मजा आ जाता. तुम्हें पता है उसमें मेरा सबसे फेवरेट गाना कौन सा था? हां पता है वो जो चित्रा सिंह और जगजीत सिंह की आवाज में था दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाय तो मिट्टी है...! और तुम्हे ये पता है वो गाना इतना पसंद क्यूं है? हां क्यूंकि जगजीत का एक ही बेटा था जो कि सड़क दुर्घटना में मर गया और चित्रा की आवाज में वो दर्द झलकता था.
          दूसरों की सफलता देख कर तुम मायूस क्यूं होते हो? कौन कहता है ऐसा? फिर झूठ!! अरे बाबा कितना भागोगे खुद से? मैं भाग नही रहा...तो फिर छुपा क्यूं रहे हो? क्या? वही? क्या वही? अच्छा चलो छोडो. मैं भाग नहीं रहा मेरा यकीन करो. अरे ठीक है बाबा तुम भाग नहीं रहे अब खुश! प्लीज़ ऐसे मत बोलो मैं पहले से परेशान हूं. क्या करूं कैसे करूं कुछ समझ में नही आता. तो किसी से मदद क्यूं नहीं मांग लेते? किससे मांगूं? उसी से...हम्म!! उसे खुद मदद चाहिए बेचारी मेरे कारण इतना जला कटा सुन रही है उससे क्या मदद मांगूं और किस मुंह से मांगूं?
         सफल तो हो नहीं पाया कभी सोचा किसी को सफल बना दूं लेकिन बुरा ही कर बैठा प्च!! ये स्साला समाज कब सुधरेगा? क्या मैंने कोई एप्लीकेशन दिया था उस स्साले भगवान को कि मुझे...!! क्या मुझे! आगे बोलो. नहीं बोल सकता आगे. फिर इसी तरह परेशान रहोगे. तुम्हे इतना आसान क्यूं लगता है मैंने कहा न मैं आगे नहीं कह सकता. लेकिन क्यूं नहीं कह सकते ऐसा क्या है सिर्फ हम तुम ही तो हैं और तो कोई नहीं दिख रहा यहां फिर क्यूं नहीं कह देते. कैसे कह दूं? वैसे ही जैसे उसे कह दिए थे ''आई लव यू''! लेकिन वो तो एक मज़बूरी थी. हें!!! तुमने उसे मज़बूरी में आई लव यू कहा था?? प्लीज़ मुझे इतिहास में लेकर मत जाओ मुझे डर लगता है. लेकिन तुम तो बहादुर हो. अकेले बड़ा बड़ा काम किये हो तो फिर डरते क्यूं हो सच से? मैं सच से डरता नहीं लेकिन पता नहीं क्यूं बोल नहीं पता हूं. डर के अलावे भी तो कोई और वजह हो सकती है न!! बिल्कुल हो सकती है लेकिन तुम्हें आज न कल तो सच्चाई बतानी ही पड़ेगी. तब का तब देखेंगे.

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