Friday, September 2, 2011


             अन्ना टीम की चुप्पी से शक के घेरे में आया अभियान 

अग्निवेश का अध्याय क्या पिछले पाठ की पुनरावृति है?
         अग्निवेश के सच के पीछे के कई सच अब बाहर आने के लिए उतावले होने लगे हैं ऐसे में वाजिब है कि अन्ना टीम कोई न को गलती कर दे. कहा भी गया है कि आप कितना भी चौकन्ना क्यूं नही हों गलती हो ही जाती है. अशोक सिंघल के बयान जिन्होंने भी हलके में लिया उन्हें जोर का झटका देते हुए अरविन्द केजरीवाल ने राहुल गांधी से सहमती जताई है. ध्यान रहे है कि ''इण्डिया एगेंस्ट करप्शन'' ने कुछ ही दिन पहले हवा के झोंक में फेसबुक पर राहुल गांधी को न केवल लपेटे में लिया था बल्कि उनके घर के बाहर प्रदर्शन के लिए लोगों से अपील भी की थी. मीडिया को बेहतरीन रूप से मेनेज करके आयोजित इस अभियान में राहुल गांधी के घर पे समोसा और कोल्ड ड्रिंक्स ठूसने कि खबर लगभग नही आई, अलबत्ता सोशल मीडिया में कुछ लोगों ने   ''इण्डिया एगेंस्ट करप्शन''  से अपील की थी कि वो इस बाबत स्पष्टीकरण दें, लेकिन स्पष्टीकरण नही आ पाया. यहां से शक शुरू हुआ और जब अग्निवेश की कथित दलाली का सनसनीखेज खुलासा होने के बाद  ''इण्डिया एगेंस्ट करप्शन''  द्वारा सफाई देने के बदले पूरे मामले से ही पल्ला झाड़ लेने की नृशंश कार्रवाई ने शक को और गाढ़ा किया और अब अरविन्द केजरीवाल ने राहुल गांधी के इस बात का समर्थन करके कि लोकपाल को चुनाव आयोग की तर्ज पर बनाया जाय, उस शक को यकीन में बदल दिया है.

अग्निवेश मंजे हुए कलाकार हैं, उनकी चुप्पी का राज क्या है?

          सच पूछिये तो अब  पूरा मामला ही प्रायोजित लगता है. योवाओं की आर में दक्षिणपंथी  ताकतों का सहारा लेना, दलित और मुस्लिम बच्चों के हाथों अनशन तुडवाना और बड़े ही नाटकीय तरीके से अग्निवेश का खुलासा होने के बाद चुप्पी रखना सारी बातें शक पैदा करती हैं. चर्चा है की अग्निवेश का चरित्र अन्ना के शीर्ष सहयोगी पहले से जानते थे और उनका उपयोग कोंडम की तरह किया गया. एक चर्चा यह भी है कि अग्निवेश जो भी कर रहे थे वो सब पहले ही जानते थे, लेकिन सोशल मीडिया ने सारा काम बिगाड़ कर रख दिया. याद कीजिये किस तरह मनमोहन सरकार के शेअर्होल्डर कपिल सिब्बल और सुबोध कान्त सहाय और सहयोगियों ने रामदेव का गेम बिगाड़ा था. तब भी एक खुलासा हुआ था, जो पत्र कि शक्ल में था. ऐसा क्यूं न माना जाय कि अग्निवेश प्रकरण भी इसी तर्ज पर था. आखिर वो कौन सा दवाब है जिसने अन्ना को मांगें पूरी होने से पहले ही अनशन समाप्त करने को बाध्य कर दिया और मीडिया में ये बड़ी खबर छोटी खबर भी नहीं बन सकी. अग्निवेश को विलेन बनाने से फायदा किसे मिल रहा है ये देखिये. अन्ना की टीम पवित्र है इसका इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है? राहुल गांधी को प्रधानमंत्री लोंच करने के लिए कोंग्रेस कब से ताक में है, अन्ना अभियान से जुड़े आम लोग इस गणित को समझ नही सके हों लेकिन जब तक समझेंगे तब तक बहुत देर हो जायगी. 

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