Friday, September 9, 2011

                         मेरा रूम मेट और भूकंप का पहला अनुभव
     
       जनवरी की ठंढ़ थी। देर रात कम्बल में लिपट कर कुर्सी टेबल से चिपक कर पढ़ने का मजा और होता है इस मौसम में। खासकर जब कमरा अंधेरा हो और सिर्फ टेबल पर रोशनी बिखड़ी हो। रूम मेट सो चुका था ओर मै सप्लाई वाटर के इंतजार में था। कटवरिया सराय में जिस बिल्डिंग में मैं रहता था वहां देर रात एक से तीन बजे तक पीने का सप्लाई वाटर आता था। आई आई एम सी, आई आई टी और जेएनयू से नजदीक होने के कारण कटवरियासराय छात्रों का गढ़ था। मैं और रूम मेट बारी बारी से रात में जाग कर पानी भरते थे क्योंकि हम दोनों में से किसी के पास खरीद कर पानी पीने लायक पैसे नहीं होते थे बाकी लड़कों की तरह।
         18 जनवरी की रात थी। मैं शायद प्रतियोगिता दर्पण पढ़ रहा था और कमरे का गेट खुला छोड़ रखा था। सप्लाई वाटर के लिए लगा नल कमरे से बाहर था। मैं चौथे माले पे रहता था और उस माले पर लगभग सभी लोग उसी नल से पानी भरते थे। मैने नल थोड़ा खुला छोड़ रखा था ताकि पानी आने पर पता चल जाये। रात करीब साढ़े बारह बज रहे होंगे। टेबल लैंप अचानक किताब पर गिरने लगा। मैं डर गया। कमरे में ऐसी शांति थी कि हवा की भी आवाज सुनाई दे रही थी ऐसे में अचानक सब कुछ हिलने से डरना स्वाभाविक था। घर पे रोज रात को सोनी पर आहट देखने से डर वैसे भी पैदा हो चुका था। मैंने टेबल लैंप ठीक से रख दिया फिर पढ़ने लगा। कुछ सेकेंड बाद ही टेबल पर रखा कैलेंडर गिर गया। मैंने झटक कर कमरे का गेट लगाया। तुरंत अपने रूम मेट गोपाल जी की ओर बढ़ा जो सोए थे। फिर पता नहीं क्या मन में आया कि मैं गेट खोलकर बाहर निकल गया। छत के कोने में आया तो हल्ले की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। आईआईटी हॉस्टल में हल्ला हो रहा था। धीरे धीरे अगल बगल के सभी छतों पर झुंड में लोग आने लगे। मैं वापस कमरे में रूम मेट को जगाने आया कि इसी बीच मेरे मोबाइल पे ताबड़तोड़ दो तीन मैसेज आ गए। झारखंड के रमेश भगत और मधेपुरा के स्वपनल सोनल का मैसेज था कि पाकिस्तान में भूकंप आया है जिसका असल दिल्ली में भी देखा गया है। मैंने फटाफट उस मैसेज को कुछ और जगहों पर अग्रसारित किया। कल होकर मैंने घर में बताया। सबसे मजा तब आया जब कल होकर मेरे रूम मेट ने कहा कि आप कमरे से बाहर चले गए और मुझे बिना जगाए अकेला छोड़ दिए। शायद मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था। खैर, मुझे भूकंप का पहला रोमांचक अनुभव मिल चुका था।

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