Sunday, June 26, 2011

समाज


                                                        हो क्या रहा है तमिलनाडू में

               वे तो अपना आत्मविश्वास बढ़ाने, इश्वर की कृपा से आकांक्षी होकर वहां गए थे. मान लीजिये वह मंजीर नहीं होता गाँव कसबे के किसी बुजुर्ग का घर होता और वो उससे आशीर्वाद लेने जाते तो क्या वह बुजुर्ग भी उनके साथ ऐसा ही करता? शायद न करता, क्या आपके सामने कोई शरद्ध विश्वास से झुका हो तो आप उसके साथ ऐसा क्रूर व्यवहार कर सकते हैं? क्या उनके श्रद्धा विश्वाश का मूल्य आपके कथित पवित्रता से ज्यादा हो सकती है और क्या इश्वर जिसके गरवग्रिः के पास तक कोई तथाकथित नीची जाती का कोई व्यक्ति आ जाय तो इश्वर अपित्र हो जाता है? ये कैसी पवित्रता है जो व्यक्ति के छूने भर से भंग हो जाती है. क्या उस इश्वर की पवित्रता तब भंग नहीं हुई जब उस लड़के को उसके सामने दो मुस्तंड लड़कों ने मारा और उस लड़के की बहन वहां रोती बिलखती रही? यह कैसी पवित्रता उअर अपवित्रता है जो जाती धर्म से जुडी हुई है? कोई मस्जिद कोई गुरुद्वारा कोई चर्च तो दलित के प्रवेश से अपवित्र नहीं होता तो मंदिर कैसे हो जाते हैं. तो क्या वे पुजारी अपवित्र नहीं हैं जो भले ही सुबह सवेरे नहाते हों, धुले कपडे पहनते हों मगर जिनके अन्दर इतनी ज्यादा हिन्दा भरी हो? जो हिंसक हैं जो मंदिर में आये मासूम बच्चों का अपमान करता है, उनके श्रद्धा विश्वास की खिल्ली उडाता है वह तो पवित्र है क्यूंकि वह ब्रह्मण है. क्यूंकि वह रोज सुबह नहाता है, क्यूंकि वह नियम धर्मी है मगर वह अपवित्र है जो मंदिर में श्रद्धा भाव से आता है, मासूमियत से आता है, उस जगह को उस इश्वर को अपना रक्षक, शुभेक्शु और सर्वश्व मानता है? 'पवित्रता' को लानत है जो मनुष्य को मनुष्य नहीं समझती.
पिछले दिनों विष्णु नागर ने तमिलनाडु की उस घटना की ओर ध्यान दिलाया जिसमें दो दलित भाई बहन को मंदिर के एक पुजारी ने बुरी तरह पीटा था। घटना तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के सिद्धि विनायक मंदिर की थी। घटना यह थी कि 17 वर्ष के के. विनीत की 15 वर्षीय बहन के. श्रुति ने दसवीं की परीक्षा दी थी और उस दिन बच्ची का रिजल्ट आने वाला था। परीक्षा परिणाम की धुकधुकी मन में कैसी बजती है, इसे हम सब ने कभी न कभी जाना है। स्वाभाविक है कि श्रुति ने अपने भाई से कहा होगा या भाई ने ही श्रुति से कहा होगा कि ‘‘जा, भगवान के दर्शन कर आ, उनका आशीर्वाद ले आ, सब अच्छा होगा! अच्छे नम्बर से पास हो जाएगी‘ तो इसलिए शायद विनीत अपनी बहन को लेकर मंदिर आया होगा। हमारे यहां इतने मंदिर हैं और तमिलनाडु इसका कतई अपवाद नहीं है। कई मंदिरों में बहुत देर तक कोई आता नहीं तो ये भाई बहन मंदिर में जाकर, वहां भगवान के दर्शन करके एक प्लेट में रखी विभूति लगाकर जब चलने चलने को हुए तब मंदिर के पुजारी और उसके बेटे को पता चला कि दलित लड़के लड़की अंदर गए हैं। लेकिन पुजारी जी जब तक पहुंचते सब हो चुका था। भाई अपने बहन के सर पर भभूत लगा चुका था।पुजारी जी इस प्रकार मंदिर के अप वित्र हो जाने से इतने ज्यादा क्रुद्ध हुए किउन्होंने श्रुति को खैर बख्श दिया मगर विनीत को तरतर झापड़ मारे.
            खैर हल्ला मचा पुजारी जी और उनके बेटे पकडे गए हैं अभी उनपर गालीगलौज करने और मारपीट करने की धाराएँ पुलिस ने लगाई है लेकिन दवाब बढेगा तो दलितों के प्रति हिंसा  की धाराएँ भी लगाई जायगी. इन दोनों को जज भी शायद हो जाय कानून इनके खिलाफ शायद इतना ही कर सकता है.
              बहरहाल पुजारी जी कितने ही नाराज  क्यूँ न हुए हों  मगर जिन भगवन जी की शरण में श्रुति गई थी लगता है वो नाराज नहीं हुए. श्रुति को परीक्षा में 71  फीसदी अंक आये. शायद इतने ही मिलने की उसे उम्मीद रही होगी या उससे भी ज्यादा या कम की रही होगी. हो सकता है श्रुति बारहवीं तक पढ़ जाय बी ए, एम् ए भी कर जाय क्या पता वह कुछ बन जाय इन पंडितों की संतानों से आगे निकल जाय. यह व्यवहार श्रुति के भाई के साथ मंदिर में हुआ यह तकलीफ पहुंचता है. विनीत और श्रुति मंदिर इसलिए गए थे क्यूँकी इश्वर का आशीर्वाद उन्हें मिलेगा तो वह अच्छे अंकों से पास हो जायेंगे. उनके मन में इश्वर या मंदिर की कथित पवित्रता को नष्ट करने की बात नहीं थी. वे विशुद्ध भक्ति भाव से वहां गए थे. वे शायद कुछ क्षण अपने दलित होने से भी अनजान थे या नहीं थे. तब भी उन्हें यह एहसास नहीं था की मंदिर के गर्व गृह से भभूत लेकर सर पर लगाने से मंदिर देवता सब अपित्र हो जायेगे.

No comments:

Post a Comment