Tuesday, October 5, 2010

                                                       
अहा !! ज़िन्दगी....

उसने एक बार कहा था कि उसकी जिंदगी का एक ही सच है और वो यह कि "वो मुझे चाहता है ।"....और मैं उस सच को हक़ीकत बनते हुए देखना चाहती थी .....मगर दुनिया कहती है कि "जिंदगी पैसों से चलती है ।".....सच यही है ....चाहे कडवा समझो, खट्टा समझो या मीठा .....सच यही है .....तब दुनिया को ठेंगा दिखाने का मन करता था ....सब कुछ जीत लेने का मन करता था .....लेकिन कहाँ जानती थी कि इसके परे भी लोगों के बने बनाये नियम है ....उनके हिसाब में जोड़े गये नये नियम कम और ज्यादा के थे .....जिंदगी कम पैसों में नहीं ज्यादा पैसों से चलती है....असली जिंदगी पैदल का नहीं हवा में बातें करने का नाम है....चाहे वो साइकिल हो, कार हो या हवाई जहाज .....चुनना हमें है ।


                इस सच के बावजूद भी कि वह कॉलेज का सबसे ज्यादा अंक पाने वाला छात्र था .....जिंदगी में वह पीछे होता गया ....और इन सबके बीच जिंदगी के नये नियम मालूम चले और लोगों ने सिखाया, समझाया कि आगे बढ़ना जिंदगी का नाम है ....किसी ने इसे जिंदगी का नया नियम बताया था .....वो वक़्त, वो पीछे के नियम और वो खुद भी बहुत पीछे रह गया था....जब मैंने पिताजी के बताये हुए लड़के से शादी कर ली थी .....जिसकी नौकरी 5 लाख रिश्वत देकर लगी थी .....दुनिया के लिये मैं अब एक इंजीनियर की पत्नी थी....एक ऐसे इंसान की पत्नी जो महीने पर हज़ारों-लाखों रुपए ऊपर से कमाता है .....पर क्या मैं खुश थी ? आखिर जिंदगी क्या है ? इस सवाल के जवाब के लिये मैं हमेशा उलझी रही ....ना तो सवाल ही समझ आया कभी और जवाब तो बहुत कहीं पीछे छोड़ आयी थी ....कई बरस बीत गये खोज में लेकिन हासिल कुछ भी ना हुआ....कई बरस बाद भी मैं रही तो वहीँ की वहीँ ....


                  उस एक रोज़ जब ये अपने कारनामों की वजह से सस्पैंड कर दिये गये थे । उस नये आये शहर के डी.एम. ने.... तब पता चला कि शहर के नये आये डी.एम. कोई और नहीं मेरा वही पुराना अतीत है....जिसका अपना परिवार है, बीवी है और बच्चा है.....शायद हमारे परिवार से कहीं बेहतर....हाँ बेहतर ही होगा....इन्होने फिर से किसी मंत्री को ले देकर पोस्टिंग पा ली....लेकिन कुछ था जो अब कहीं नहीं बचा था....शायद वह प्रश्न ?.....और उसका जवाब खुद ब खुद मिल गया था.....कि जिंदगी जीने का कोई नियम नहीं होता !!
                                                                                                                 साभार : एक भुक्तभोगी

7 comments:

  1. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  2. हिन्दी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है दोस्त.. ऐसे ही लिखते रहिये..

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  3. अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं ।

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  5. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  6. सार्थक लेखन के लिये आभार एवं “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव भी जीते हैं, लेकिन इस मसाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये यह मानव जीवन अभिशाप बन जाता है। आज मैं यह सब झेल रहा हूँ। जब तक मुझ जैसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यही बडा कारण है। भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस षडयन्त्र का शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल दो मिनट का समय हो तो कृपया मुझ उम्र-कैदी का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आप के अनुभवों से मुझे कोई मार्ग या दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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