Monday, August 9, 2010

मुश्किल होता है इस  निष्कर्ष पे पहुचना कि जो समय आप काट रहे है वो ''टाइम पास'' है या हर पल का निवेश आप अपने अच्छे भविष्य के लिए कर रहे है!आज का क्लास झेल पाने लायक नहीं था.मुझे तो नींद आ गई थी...स्वप्नल ने जगाया लेकिन प्रधान सर कि नजर भी सटी पलको पे पर चुकी थी तब तक.वो जरुर समझ गए होंगे.
     दिनचर्या इतना चुनौती भरा है कि बड़ी मेहनत लग रही है संतुलन बनाने में.प्रतियोगिता दर्पण,chronicle ,योजना,frontline  के अलावे इग्नू ,डेली newspapar ,गणित,reasoning , law कि तयारी भी देखनी मुझे ही है...IIMC से ८ बजे डेरा के लिए जाता हु...नो बजे पहुचकर पढाई करने का दुस्साहस तो करना शुरू कर दिया है लेकिन पहले ही दिन कल ट्यूब में गर्बरी आ गई ,अब अँधेरे में याद माँ कि आई सो फ़ोन घुमा दिया घर पे,माँ सोई थी अलबत्ता पापाजी ने कहा कि गैस ख़त्म हो गया है.लो!!!आज गैस मालिक को फ़ोन लगाया तो ४ कॉल के बाद उठा कर कहता है कि मेरे भाई को गठिया हो गया है,मै जमुई में हु,अब अगर में उससे कहता कि एक सिलेंडर भिजवा दो तो कहता कितना असंवेदनशील है!!!यारो, आप ही बताओ में क्या करू?  

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